दिनदहाड़े हुई वारदात ने हिलाया सीमांचल – मां की चीख, पुलिस की दौड़, गांव में खौफ का साया

मधेपुरा / ब्यूरो रिपोर्ट

शनिवार की दोपहर शांत बैजनाथपुर गांव अचानक आतंक के साये में डूब गया। लाल रंग की अपाचे बाइक पर आए दो नकाबपोश अपराधियों ने घर के आंगन में खेल रहे मासूम आर्यन कुमार (4 वर्ष) को गोद में उठाया और फर्राटा भरते हुए फरार हो गए।

गांव की गलियों में सिर्फ एक आवाज गूंजी – “बच्चा ले भागा… बच्चा ले भागा!”
और देखते-देखते पूरा इलाका सहम गया

मां की आंखों के सामने छीना गया लाल

अपहृत बालक की मां गुड़िया देवी रोते हुए बोलीं –
“मेरा बेटा दरवाजे पर खेल रहा था… अचानक दो लोग आए, गोद में उठाया और मोटरसाइकिल पर बैठाकर भाग निकले। मैंने सोचा कोई अपना होगा… लेकिन मेरा लाल मुझसे छीन लिया गया।”
गुड़िया देवी की सिसकियां सुन गांव का हर दिल पिघल गया।

गांववालों का बयान: रिश्तेदार समझकर रह गए खामोश

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बच्चा अपहरण के वक्त जोर-जोर से रो रहा था, लेकिन लोग उसे रिश्तेदार समझकर चुप रहे।
जब देर तक खोजबीन के बाद भी बच्चा नहीं मिला, तब सच्चाई सामने आई और गांव में हड़कंप मच गया।

पुलिस अलर्ट – ऑपरेशन “आर्यन की तलाश” शुरू

सूचना मिलते ही एसडीपीओ अविनाश कुमार और थानाध्यक्ष अमित रंजन दलबल के साथ मौके पर पहुंचे।
एसडीपीओ ने कहा –
“हम कई एंगल से जांच कर रहे हैं। वैज्ञानिक तरीकों से अपराधियों का सुराग निकाला जा रहा है। जल्द ही बच्चा सकुशल बरामद होगा।”

गांव में खौफ और गुस्सा

127 साल पुराने इस गांव ने ऐसी वारदात पहले कभी नहीं देखी। लोग दहशत में हैं और सवाल उठा रहे हैं –
यह अपहरण फिरौती के लिए है या इसके पीछे कोई और गहरी साजिश?
पुलिस की गश्त व्यवस्था क्यों नाकाम साबित हुई?

क्राइम अलर्ट: कोसी सीमांचल की चुनौती

दिनदहाड़े मासूम का अपहरण अब सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे सीमांचल की कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।
लोगों की नजरें अब सिर्फ पुलिस पर टिकी हैं – क्या आर्यन सकुशल वापस आ पाएगा?

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