निजी वाहन से मासूम को स्कूल ले जाने का आरोप, हादसे के बाद इलाज के खर्च से इनकार और धमकी का आरोप; बच्चे की हालत नाजुक

उदाकिशुनगंज।

निजी वाहन से मासूम को स्कूल ले जाने का आरोप, हादसे के बाद इलाज के खर्च से इनकार और धमकी का आरोप; बच्चे की हालत नाजुक

उदाकिशुनगंज थाना क्षेत्र के राहठा चौक स्थित एकेडमी वर्ल्ड स्कूल से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि स्कूल से जुड़े एक निजी वाहन की चपेट में आने से करीब दो वर्षीय मासूम बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद बच्चे को आनन-फानन में उदाकिशुनगंज पीएचसी ले जाया गया, जहां उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। फिलहाल बच्चे की हालत नाजुक बताई जा रही है।

बताया जा रहा है कि घटना के बाद ग्रामीण स्तर पर पंचायती कर बच्चे के इलाज के लिए उसे बाहर भेजा गया था। उस समय वाहन मालिक की ओर से इलाज का खर्च उठाने की बात कही गई थी। लेकिन परिजनों का आरोप है कि अब इलाज के खर्च की जिम्मेदारी लेने से इनकार किया जा रहा है।

परिजनों का यह भी आरोप है कि स्कूल प्रबंधन की ओर से उन्हें धमकी दी जा रही है कि यदि ज्यादा बात की गई तो उल्टा केस कर जेल भिजवा दिया जाएगा। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

बड़ा सवाल—निजी वाहन से बच्चों को ले जाने की अनुमति किसने दी?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर संबंधित वाहन निजी नंबर का वाहन है, तो क्या उसे स्कूली बच्चों को लाने-ले जाने के लिए वैध रूप से इस्तेमाल किया जा रहा था? यदि हां, तो इसके लिए आवश्यक अनुमति और सुरक्षा मानकों की जांच किस विभाग द्वारा की गई थी?

दूसरा सवाल यह भी है कि स्कूल प्रबंधन द्वारा बच्चों की सुरक्षा के लिए कौन-कौन से इंतजाम किए गए थे? यदि किसी वाहन से हादसा हो जाता है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?

और यदि परिजनों द्वारा लगाए गए धमकी के आरोप सही पाए जाते हैं, तो किसके निर्देश पर पीड़ित परिवार को उल्टे मुकदमे में फंसाने और जेल भेजने की धमकी दी जा रही है?

अभी पुलिस को नहीं दी गई है सूचना

फिलहाल मिली जानकारी के अनुसार इस मामले में पुलिस को आधिकारिक रूप से कोई सूचना नहीं दी गई है। यदि परिजन या अन्य संबंधित व्यक्ति प्रशासन और पुलिस को लिखित रूप से मामले की जानकारी देते हैं, तो देखना होगा कि प्रशासन पूरे मामले की जांच किस तरह करता है और वाहन, चालक तथा स्कूल प्रबंधन की भूमिका को लेकर क्या कार्रवाई होती है।

फिलहाल सबसे बड़ी चिंता दो वर्षीय मासूम की जिंदगी है, जिसकी हालत नाजुक बताई जा रही है।

अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में संज्ञान लेता है या नहीं और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो बिना वैध अनुमति स्कूल परिवहन में इस्तेमाल किए जा रहे वाहन तथा बच्चों की सुरक्षा में लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है।

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